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सुप्रीमकोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा कि नोटबंदी से पूर्व दिमाग लगाया या नहीं ?

Posted On: 18 Dec, 2016 Junction Forum में

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सुप्रीमकोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा कि नोटबंदी से पूर्व दिमाग लगाया या नहीं ?
-RAMPAL SRIVASTAV
नोटबंदी के कारण केंद्र सरकार की हो रही किरकिरी कम होने का नाम नहीं ले रहीं है | इससे हो रही तकलीफ़ों के मद्देनज़र अब सुप्रीमकोर्ट ने कड़ा रुख़ अपना लिया है | उसने नोटबंदी को लेकर सरकार द्वारा की गई लचर तैयारियों के लिए उसे फटकार लगाई है । साथ ही 16 दिसंबर के अपने अंतरिम आदेश में उसने नोटबंदी के संबंध में केंद्र सरकार के विगत आठ नवंबर के फ़ैसले की संवैधानिकता के सवाल पर पांच सदस्यीय संविधान पीठ के गठन की व्यवस्था दी | यह पीठ उन बिन्दुओं पर विचार करेगी , जिनको सुप्रीमकोर्ट ने पिछली सुनवाई के दौरान तैयार किया था | शीर्ष अदालत ने नोटबंदी के बारे में सरकारी आदेशों में कोई हस्तक्षेप नहीं किया , लेकिन कई बातों की जानकारी ज़रूर मांगी | पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केंद्र इस बात का जवाब दे कि लोगों के बीच कैश को सामान्य तरीके से क्यों नहीं बांटा जा रहा। सुप्रीम कोर्ट का इशारा उस तरफ था कि किसी-किसी के पास इतने सारे नोट बरामद हो रहे हैं और ज्यादातर लोग लाइन में लगे हुए हैं। चीफ जस्टिस टी एस ठाकुर, जस्टिस ए एम खनवालकर और जस्टिस डी वाई चंद्रचूड की बेंच ने कहा कि नोटबंदी की वजह लोग बड़ी परेशानी में आ गए हैं। बेंच ने कहा कि कुछ लोगों को इतना सारा पैसा मिल रहा है और कुछ लोग एक नोट के लिए भी तरस रहे हैं। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि रोजमर्रा की जरूरतों के लिए पुराने नोटों को फिलहाल चलने दिया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है कि आखिर कुछ लोगों के पास लाखों रुपये के नए नोट पाए जा रहे हैं और आम जनता को 24 हजार रुपये तक नहीं मिल पा रहे हैं। शीर्ष अदालत ने कहा कि सरकार के नोटबंदी के फैसले से बहुत सारे लोग प्रभावित हैं जबकि कुछ लोग इससे अप्रभावित हैं। चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने गत 15 दिसंबर को यह सवाल उठाया कि नोटबंदी के बाद आम लोगों को परेशानी से जूझना पड़ रहा है वहीं दूसरी ओर कुछ लोगों के पास लाखों रुपये के नए नोट मिल रहे हैं। जबकि निकासी की सीमा निर्धारित है। पीठ ने सरकार की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी से पूछा कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है।
जवाब में अटॉर्नी जनरल ने कहा कि बैंक के कुछ अधिकारी गैरकानूनी तरीके से पुराने नोटों को बदलने में शामिल पाए गए हैं। सरकार ऐसे अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार बैंकों पर नजर रख रही है। साथ ही अटॉर्नी जनरल ने कहा कि पुराने नोटों के बदलने में कुछ गड़बडिय़ां सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि लोगों की समस्या को दूर करने की हरसंभव कोशिश की जा रही है। वहीं सरकार की ओर से अटार्नी जनरल ने बताया कि वह जिला सहकारी समितियों को 500 और 1000 रुपये के पुराने नोटों को जमा लेने की इजाजत दे सकती है, लेकिन इन नोटों को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया में जमा कराना होगा। साथ ही इसके लिए ग्राहकों को केवाईसी फॉर्म भरना होगा। शीर्ष अदालत ने यह भी जानना चाहा कि आखिर सरकारी अस्पतालों में पुराने नोटों को स्वीकार क्यों नहीं किया जाना चाहिए। अदालत ने कहा कि इससे तो मरीजों को इलाज कराने में परेशानी हो सकती है। जवाब में अटॉर्नी जनरल ने कहा कि करीब पांच लाख करोड़ रुपये के नए नोट मार्केट में हैं। वहीं 100, 50, 20 और 10 के पुराने नोट पहले से ही बाजार में हैं। ऐसे में नोटों की कमी नहीं है। उन्होंने कहा कि पुराने नोटों को स्वीकार करने को लेकर कुछ समस्याएं आई हैं। पेट्रोल पंप मालिक सिर्फ 500 और 1000 रुपये की पुराने नोट ही जमा करा रहे हैं। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता अश्विनी उपाध्याय ने पीठ से कहा कि सिर्फ 5000 रुपये तक के लेन-देन को ही नकदी के तौर पर स्वीकार किया जाना चाहिए। पीठ ने याचिकाकर्ता को अपनी सलाह अटॉर्नी जनरल तक पहुंचाने के लिए कहा है। वहीं सुनवाई के दौरान एक वकील ने बताया कि दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) की ओर से 500 और 1000 रुपये के लाखों पुराने नोट जमा कराए गए। जबकि डीटीसी बसों में टिकट पांच, 10, 15, 20 और 25 रुपये के हैं। ऐसे में इतनी बड़ी संख्या में 500 और 1000 रुपये के पुराने नोट कहा से आएं। पीठ ने सभी पक्षों को सुनने के बाद कहा कि वह पहलुओं पर गौर करेंगे और लोगों को होने वाली परेशानी को कम करने के लिए जरूरी हुआ तो निर्देश जारी किए जाएंगे। वहीं याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि नोटबंदी को लेकर आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सरकार की ओर से हर हफ्ते अधिकतम एक खाते से अधिकतम 24 हजार रुपये निकालने की इजाजत दी गई है, लेकिन लोगों को यह रकम भी नहीं मिल पा रही है।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि ‘ पुराने नोटों को फिलहाल सरकारी अस्पतालों में चलने दिया जाना चाहिए , ताकि लोग दवाई ले सकें। अगर आप लोग व्यवस्था नहीं कर पा रहे तो आम लोग क्यों परेशानी झेलें?’ इस पर अटर्नी जनरल मुकल रोहतगी ने कहा कि लोग जिस भी परेशानी का सामना कर रहे हैं वह कुछ ही दिनों में खत्म हो जाएगी। अतः कोर्ट पुराने नोटों के इस्तेमाल के लिए कोई आदेश पारित न करे। रोहतगी ने कहा कि अगर सुप्रीम कोर्ट ने पुराने नोटों को चलाने का ऑर्डर दे दिया तो काफी मात्रा में कालाधन सफेद कर लिया जाएगा। रोहतगी ने यह भी माना कि पेट्रोल पंप और रेलवे रिजर्वेशन के जरिए काफी सारा कालाधन सफेद कर लिया गया है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट ऐसे लोगों को दोबारा मौका न दे। सुप्रीमकोर्ट नोटबंदी से उत्पन्न समय पर 15 याचिकाओं की सुनवाई कर रहा है | सुप्रीमकोर्ट ने सभी से बात करके सवालों की सूची तैयार की है और कहा है कि वह इस मामले में जनवरी से सुनवाई शुरु कर सकता है | साथ ही नोटबंदी पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान केंद्र से पूछा कि क्या इस मामले में कोई रिकार्ड है ?नोटबंदी से पहले दिमाग लगाया गया कि इससे कितनी करेंसी वापस आएगी? कैसे नई करेंसी छापी जाएगी? क्या इसके लिए कोई योजना थी? सरकार को नोटबंदी के फैसले से क्या उम्मीदें थीं? कोर्ट ने पूछा कि लोगों से किया वायदा पूरा होना चाहिए | इस पर अटॉर्नी जनरल द्वारा सरकार से जवाब मांगा | इसके साथ ही नोटबंदी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के लिए मुद्दे तैयार किए | कोर्ट ने कहा इन सवालों पर ही होगी सुनवाई : 1. नोटबंदी का फैसला आर बी आई एक्ट 26 (2) का उल्लंघन है? जिसमें कहा गया है कि केंद्रीय बोर्ड की मंजूरी से ये किया जा सकता है और किसी सीरीज के नोटों को बंद किया जा सकता है | 2. नोटबंदी का 8 नवंबर 2016 और उसके बाद के नोटिफिकेशन असंवैधानिक हैं? 3. नोटबंदी संविधान के दिए समानता के अधिकार अनुच्‍छेद 14 और व्यापार करने की आजादी से संबंधित अनुच्‍छेद 19 जैसे मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हैं? 4. नोटबंदी के फैसले को बिना तैयारी के साथ लागू किया गया जबकि न तो नई करेंसी का सही इंतिजाम था और ना ही देश भर में कैश पहुंचाने का? 5. बैंकों और ATM से पैसा निकालने की सीमा तय करना लोगों के अधिकारों का हनन है ?
6 जिला सहकारी बैंको में पुराने नोट जमा करने और नए रुपये निकालने पर रोक सही नहीं है? 7. कोई राजनीतिक पार्टी जनहित के याचिका के तहत सुप्रीम कोर्ट में दाखिल कर सकती है ? सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से AG मुकुल रोहतगी ने सवाल उठाया कि माकपा जैसी राजनीतिक पार्टी कैसे जनहित याचिका दाखिल कर सकती है? चीफ जस्टिस ठाकुर ने कहा कि वे इस मामले की सुनवाई भी करेंगे | वहीं याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट पी. चिदंबरम ने कहा कि देश भर में 371 कोऑपरेटिव बैंक हैं और इस कारण अर्थव्यवस्था पर असर हो रहा है। इसी बीच अटॉर्नी जनरल ने तमाम केसों के ट्रांसफर का मुद्दा उठाया और कहा कि देश भर में रोजाना नोटबंदी मामले में पिटिशन फाइल हो रही है| देश भर में ऐसे 70 अर्जी दाखिल हो चुके हैं, सुप्रीम कोर्ट में 15 अर्जियां दाखिल की गई है. ऐसे में तमाम मामले को एक हाई कोर्ट ट्रांसफर किया जाना चाहिए. इस पर चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर ने कहा कि अदालतें होंगी और मामले होंगे तो कोर्ट में लोग आएंगे ही | इससे पहले एक याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से दो बातों का जवाब मांगा था – कोर्ट बैंक से पैसा निकालने की कोई न्यूनतम सीमा तय करे जो पूरे देश में लागू हो और कोई भेदभाव न रहे तथा धन – निकासी की जो लिमिट तय की जाए , उसे बैंक इन्कार न कर सकें | केंद्र सरकार की तरफ़ से अटार्नी जनरल ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि केंद्र सरकार इस मामले पर पूरी तरह निगरानी रख रही है | नोटबंदी को लेकर हालात किसी तरह बिगड़े नहीं हैं, यहां तक कि कोई दूधवाला या किसान इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट नहीं आया है |ये सब मामला राजनीति से प्रेरित है | प्रधानमंत्री ने 31 दिसंबर तक हालात सामान्‍य होने के लिए कहा था , जिसमें अभी भी वक्त है | 10-15 दिनों में सरकार हालात और सामान्य करेगी | इन दिनों में नई करेंसी भी जुड़ जाएगी. लेकिन ये सारी करेंसी एक साथ नहीं छापी जाएगी | वहीं याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि नोटबंदी को लेकर आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सरकार की ओर से हर हफ्ते अधिकतम एक खाते से अधिकतम 24 हजार रुपये निकालने की इजाजत दी गई है, लेकिन लोगों को यह रकम भी नहीं मिल पा रही है। अभी तक करीब 12 लाख करोड़ की पुरानी करेंसी जमा हुई है , जबकि तीन लाख करोड़ की नई करेंसी लाई गई है | रोहतगी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ये भी देखे कि क्या वह सरकार की आर्थिक नीति में दखल दे सकता है या नहीं ? साफ तौर पर अटार्नी जनरल का बयान बड़ा हास्यस्पद और हक़ीक़त से परे है | क्या हमारे देश के दूधवाले और किसान की ऐसी माली हालत है कि वह अपनी फ़रियाद लेकर सुप्रीमकोर्ट पहुंच सकता है ? दूसरी बड़ी बात यह कि यह कहना कि नोटबंदी को लेकर किसी तरह हालात बिगड़े नहीं हैं , बड़ा झूठ है | देश की जनता को बंधुआ मजदूर बनाकर रख दिया गया , फिर भी कहा जा रहा है कि सब कुछ ठीक है ! जो हालात बना दिए गये हैं , उसे देखते हुए किस आधार पर कहा जा रहा है कि आगामी 31 दिसंबर तक और सामान्य हो जाएंगे ? बक़ौल अटार्नी जनरल पिछले एक माह में मात्र तीन लाख करोड़ की नई करेंसी लाई गई है और क़रीब 12 लाख करोड़ रु. जमा कराए गए है , तो मात्र 10 – 15 दिनों में ही कैसे करेंसी की ज़रूरत पूरी की जा सकती है ? सुप्रीमकोर्ट ने सभी से बात करके सवालों की सूची तैयार की है और कहा है कि वह इस मामले में जनवरी से सुनवाई शुरु कर सकता है | साथ ही नोटबंदी पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान केंद्र से पूछा कि क्या इस मामले में कोई रिकार्ड है? नोटबंदी से पहले दिमाग लगाया गया कि इससे कितनी करेंसी वापस आएगी? कैसे नई करेंसी छापी जाएगी? क्या इसके लिए कोई योजना थी? सरकार को नोटबंदी के फैसले से क्या उम्मीदें थीं? कोर्ट ने पूछा कि लोगों से किया वायदा पूरा होना चाहिए | इस पर अटॉर्नी जनरल द्वारा सरकार से जवाब मांगा |

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1 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

jlsingh के द्वारा
December 18, 2016

मामला गंभीर है, पर कोर्ट की धीमी प्रक्रिया से न्याय होगा कहना मुश्किल है. केंद्र में अभी जो सरकार है वह रोज नए फैसले ले रही है जिसे रोकनेवाला कोई नहीं है, वहीं राजनीतिक दलों को पूरा फायदा हो यह भी ध्यान रक्खा जा रहा है. कोई अन्य दल को भी कोर्ट में आना चाहिए ताकि मनमानी रुके.


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